आर्टिकल 370 पर फजीहत के बाद सोनिया गांधी ने बदल दी अपनी रणनीति, अब ये 21 नेता तय करेंगे कांग्रेस की लाइन

लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद से विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस (Congress) की धार काफी कम हो गई है. ऐसे में सोनिया गांधी ने कांग्रेस (Congress) को एक नई दिशा देने के लिए नई रणनीति भी बना ली है. यही वजह है चाहे जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने का मामला हो या वीआर सावरकर को भारत रत्न देने की बीजेपी की मांग हो, कांग्रेस खुलकर इसका समर्थन कर रही है. सोनिया गांधी ने कश्मीर जैसे मुद्दों पर बोलने के लिए थिंक टैंक कमिटी टीम बनाई है. इस टीम का काम हर महत्वपूर्ण विषय पर पार्टी की लाइन तय करना और मीडिया के सामने उसे स्पष्ट रूप से रखना होगा.

21 सदस्यीय थिंक टैंक कमिटी में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, कपिल सिब्बल, मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अहमद पटेल इस टीम का हिस्सा होंगे. वहीं, अधीर रंजन चौधरी, रणदीप सिंह सुरजेवाला सहित कई वरिष्ठ और युवा नेता भी इसका हिस्सा हैं. बता दें कि हाल के दिनों में कांग्रेस के कई सीनियर नेताओं ने अपने आदर्शवादी मुद्दों से हटकर ऐसे मामलों का समर्थन किया है. इससे कांग्रेस की बदलती रणनीति को समझा जा सकता है.

दरअसल, सूत्रों की मानें तो ध्रुवीय राजनीति में जन सरोकार से जुड़े मुद्दों जैसे राम मंदिर, यूनिफार्म सिविल कोर्ट, दूसरे राज्यों में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) लागू करना और आर्थिक मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी स्पष्ट तरीके से अपना नजरिया नहीं रख पाई. कई अहम मुद्दों पर कांग्रेस के नेताओं के बयान ने ही पार्टी को भारी नुकसान पहुंचाया है.

आर्टिकल 370 पर अपने बयानों से उलझ गई थी कांग्रेस

ताज़ा उदाहरण आर्टिकल 370 हटाने के सरकार के फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी है, जिसमें पार्टी के कुछ नेता जनभावना को समझकर 370 के समर्थन में सरकार के फैसले के साथ थे, तो कुछ नेता पार्टी लाइन पर अटके थे.

सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी

राज्यसभा में विपक्ष नेता गुलाम नबी आजाद और पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने पुरजोर तरीके से जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म करने के बिल का विरोध किया. दूसरी ओर लोकसभा में कई नेताओं और पार्टी का एक हिस्सा इस बिल का समर्थन कर रहा था. इसका नुकसान पार्टी को ही हुआ. कांग्रेस अपनी ही नेताओं के बयानबाजी में उलझकर रह गई.

अयोध्या केस पर कांग्रेस ने बदली रणनीति


अब राम मंदिर पर फैसले के बाद भी इस तरह की स्थिति न हो, इसलिए इस कमिटी की पहली बैठक जल्द बुलाई गई है. सूत्रों की मानें, तो ये कमिटी महीने में एक बार बैठक करेगी, ताकि हर मुद्दे पर विचार विमर्श किया जाए और उसके मुताबिक पार्टी की लाइन तय हो.

इन नेताओं के बयान देने पर रोक


वहीं, कांग्रेस पार्टी ने किसी भी तरह की असहजता से बचने के लिए सीनियर नेता दिग्विजय सिंह, मणिशंकर अय्यर, सलमान खुर्शीद सरीखे नेताओं की बयानबाजी पर भी रोक लगा दी है. कांग्रेस में ये वो नेता हैं, जिनके बोलने पर पार्टी को फायदा कम और नुकसान ज्यादा हुआ है. ऐसे में इस कमिटी की पहली बैठक में इस बात पर भी जोर दिया जाएगा कि ऐसे नेता मीडिया में बयान देने हुए पार्टी लाइन का ध्यान रखें.

बैठक में इन विषयों पर भी होगी चर्चा


थिंक टैंक कमिटी की बैठक में पार्टी की आगे की रणनीति, सदस्यता, आगामी संसद सत्र में उठाए जाने वाले मुद्दों पर भी चर्चा होगी. वहीं, विभिन्न संवेदनशील मुद्दे और आगामी चुनावों में पार्टी की तैयारी पर भी विचार किया जाएगा.

सूत्रों ने ये भी बताया कि नवंबर के पहले हफ्ते में पार्टी देशभर में मंदी के मुद्दे पर प्रदर्शन करेगी. इसके साथ कांग्रेस ने दिल्ली में एक बड़े धरने की भी तैयारी भी कर ली है, जिसमें अन्य विपक्ष की पार्टियों को भी साथ में लेकर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश होगी.

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