इंदौर में 87 साल के बुजुर्ग के शव को चूहों ने कुतरा, एक लाख जमा करने के बाद ही अस्पताल ने बॉडी दी

  • परिजन ने यूनीक अस्पताल में शव को चूहे से कुतरे जाने की शिकायत की, प्रशासन ने कहा- गलती हो गई
  • इंदौर में 9 सितंबर को एक कोरोना संक्रमित की मौत हो गई थी, पर परिवार को 19 सितंबर को इस बारे में पता चला
  • 15 सितंबर को एमवायएच में स्ट्रैचर पर पड़ा शव कंकाल बन गया था, बदबू आने लगी थी, पर लोगों को पता नहीं लगा

इंदौर में कोरोना के मरीजों का इलाज करने वाले एक और अस्पताल ने सोमवार को मानवता को शर्मसार कर दिया। अन्नपूर्णा इलाके में स्थित यूनीक अस्पताल में तीन दिन पहले भर्ती हुए 87 साल के बुजुर्ग की रविवार देर रात मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि अस्पताल ने शव को रखने में लापरवाही दिखाई। पूरी बॉडी को चूहों ने कुतर दिया। परिजन को शव तभी सौंपा गया, जब उन्होंने एक लाख का बिल चुका दिया। मामला सामने आने के बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच एडीएम अजय देव शर्मा करेंगे।

शव के आंख में गंभीर घाव है।

इतवारिया बाजार के रहने वाले नवीन चंद जैन (87 साल) को सांस लेने में तकलीफ होने पर 17 सितंबर को यूनीक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। परिजन के अनुसार, बुजुर्ग का कोविड वार्ड में इलाज चल रहा था। रविवार रात करीब 3 बजे उनकी मौत की सूचना दी गई। कहा गया कि निगम की गाड़ी उन्हें अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाएगी। जब हम दोपहर 12 बजे अस्पताल पहुंचे तो हमने देखा कि शव को जगह-जगह चूहों ने कुतर रखा है। हमने प्रबंधन से बात की तो उनका कहना था कि हमसे गलती हो गई।

एक लाख रुपए का बिल थमाया, शव पर गंभीर घाव थे
परिजन प्राची जैन का कहना है, ‘जब अस्पताल पहुंचे तो एक लाख से ज्यादा का बिल थमा दिया गया। बिल जमा करने के बाद शव दिया गया। शव देखकर तो हमारे होश उड़ गए। चेहरे और पैर में गंभीर घाव थे। अस्पताल प्रबंधन ने शव को कहीं ऐसी जगह पटक दिया था, जहां चूहों ने कुतर दिया। आंख पर गंभीर घाव हो गया था।’ आक्रोशित परिजन ने शव अस्पताल के बाहर रखकर हंगामा किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाइश दी। हालांकि, काफी देर होने के बाद भी अस्पताल की तरफ से कोई जिम्मेदार नहीं आया, जो परिजन को पूरी जानकारी दे सके।

पुलिस के समझाने के बाद परिजन माने।
पुलिस के समझाने के बाद परिजन माने।

हमें मिलने नहीं दिया गया, शाम को अच्छे से बात की थी
परिजन के अनुसार, अस्पताल वालों ने भर्ती करने के बाद हमें मिलने नहीं दिया। रविवार शाम 4 बजे फोन पर बात हुई तो वे अच्छे से बात कर रहे थे। रात साढ़े 8 बजे अस्पताल वालों ने हमें बुलाया और हालत गंभीर बताते हुए हमसे कागज पर साइन करवा लिए। देर रात साढ़े 3 बजे हमें बताया कि उनकी मौत हो गई। यदि वे कह देते तो हम रात में ही शव लेकर चले जाते। अस्पताल वालों ने इस तरह से बॉडी क्यों छोड़ा? हमारे साथ अन्याय हुआ है।

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