पवार कई राजनीती के आगे बीजेपी ने टेके घुटने, कुछ नही चला न मोदी मैजिक-न शाह’नीति’…

देश की राजनीति में 79 साल के शरद पवार जितना राजनीतिक अनुभव रखने वालों की संख्या गिनती में होगी, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में उन्होंने जिस तरह से अपने राजनीतिक अनुभव और चातुर्य का इस्तेमाल कर सारे संकटों को टाल दिया और राज्य में पहली बार शिवसेना की एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन से सरकार के गठन का रास्ता साफ कर दिया.

राजनीति के धुरंधर खिलाड़ियों में माने जाने वाले शरद पवार महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे बड़े क्षत्रप बनकर उभरे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जैसे ही कहा कि बुधवार शाम 5 बजे तक देवेंद्र फडणवीस को बहुमत सिद्ध करना होगा तो बीजेपी को सांप सूंघ गया. फैसले के कुछ ही देर बाद पहले उपमुख्यमंत्री अजित पवार का इस्तीफा हुआ. फिर देवेंद्र फडणवीस ने भी इस्तीफा दे दिया. महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में सिर्फ शरद पवार ही पवार थे. ये लड़ाई सीधे मोदी-शाह के खिलाफ थी.

उद्धव ठाकरे की मायूसी

देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे और नई सरकार गठन की कामयाबी के पीछे भले ही कई चेहरे हों लेकिन असल में यह कामयाबी अकेले शरद पवार की है. उद्धव ठाकरे तो अजित पवार की शपथ के साथ ही मायूस हो गए थे, लेकिन सीनियर पवार ने ऐलान किया कि वो इस लड़ाई को मनमाफिक अंजाम तक ले जाएंगे. उनके अलावा न तो किसी के पास ये हिम्मत थी और न ही ऐसा कौशल. उन्होंने तब तक दम नहीं लिया जब तक फडणवीस की चार दिन की चांदनी को अंधेरी रात में नहीं बदल दिया.

मुख्यमंत्री भले उद्धव ठाकरे बनने जा रहे हों. कोई उपमुख्यमंत्री बनेगा और कोई विधानसभा का अध्यक्ष लेकिन मेले के नायक तो सिर्फ शरद पवार थे.

रेत की तरह चुभा शपथ ग्रहण

अंधेरे में चोरी-चोरी चुपके-चुपके दिलाई गई ये शपथ पवार की आंखों में रेत की तरह चुभ रही थी. वो ठगा हुआ महसूस कर रहे थे और उसी दिन उन्होंने ठान लिया था कि बीजेपी को महाराष्ट्र में बेनूर करके रहेंगे. उन्होंने फडणवीस के शपथ के बाद पीसी करके कहा भी था कि नंबर हमारे पास है सरकार हम बनाएंगे.

इसके बाद तो शरद पवार ने इतनी तेजी से पैंतरे चले कि बीजेपी का दिल्ली दरबार उनके इरादों को भांप ही नहीं पाया. उसके नेताओं को लग रहा था कि पवार आखिर में हथियार डाल देंगे. वो समझ ही नहीं पाए कि चार दिन की उसकी चांदनी को पवार फिर अंधेरी रात में बदल देंगे. अजित शरद पवार के साथ मिले थे.

जोर का झटका धीरे से

शरद पवार के पावर पंच के सामने न तो अजित पवार का कोई वादा बचा और न ही बीजेपी का कोई इरादा बचा. सियासत में खेल खराब कर देना क्या होता है ये हाल के बरसों में बीजेपी को पहली बार शरद पवार ने समझाया और बहुत आराम से समझाया.

तेजी से आगे बढ़ते हुए अजित पवार भी नहीं समझ पाए कि ये रास्ता सिर्फ शरद पवार के पास वापस जाता है. बीजेपी के दिग्गज सोच रहे थे कि फडणवीस ने उन्हें साध लिया है, लेकिन सत्ता की चांदनी में चौंधियाई हुई उनकी आंखें नहीं देख पाईं कि अजित पवार को सिर्फ शरद पवार साध सकते हैं.

इसी के साथ देवेंद्र फडणवीस चार दिन की चांदनी हो गए. दुनिया की सबसे विशाल पार्टी एक अकेले पवार के सामने बहुत बेबस बहुत बेचारी हो गई थी. जो हैरानी की बात है वो ये कि एक से एक दिग्गजों से भरी पार्टी अंदाजा ही नहीं लगा पाई कि पवार के पास कितनी जान है और जब वो अपने पर आएंगे तो उसका क्या हाल करेंगे.

पवार की फैमिली तोड़ना पड़ा भारी

अब जरा समझिए कि शरद पवार भड़के क्यों, क्योंकि नतीजों के बाद तो वो लगातार कह रहे थे कि उनकी पार्टी के पास विपक्ष में बैठने का जनादेश है. इससे बीजेपी के बड़े नेताओं को लगा कि पवार खेलने की उम्र पार कर चुके हैं. उसने उनका घर और पार्टी दोनों तोड़ने का पांसा फेंका. बेटी सुप्रिया सुले का दिल रो पड़ा. इस पर पवार ऐसे भड़के कि फडणवीस को उखाड़ फेंकने की शपथ उठा ली.

दरअसल, अजित पवार को तोड़कर बीजेपी ने सोए हुए शरद पवार की महत्त्वाकांक्षाओं को जगा दिया था, वर्ना वो तो लगातार कह रहे थे कि उन्हें विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है. पहले दूसरे नंबर वाले के खेल में तीसरे का कोई काम ही नहीं.

लेकिन इस बीच बीजेपी ने अजित पवार को तोड़कर शरद पवार की इस सदाशयता को कमजोरी समझ बैठी और यहीं उससे वो भूल हो गई जिसने उससे सत्ता का सपना तो छीन ही लिया सत्ता की भूखी पार्टी के तौर पर बदनाम भी कर दिया. शरद पवार ने उम्र की सीमाओं का लबादा उतार दिया और सीधे मोदी-अमित शाह से आर-पार का ऐलान कर दिया.

कसम खाने के बाद खत्म हो गया खेल

शपथ ग्रहण के बाद रात को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई गई. अगले दिन सुनवाई शुरू हुई. विधायकों को होटल पहुंचाया गया. अजित पवार को साधने की कोशिश शुरू हुई और फिर सोमवार को वो पल भी आया जब कांग्रेस एनसीपी शिवसेना के 163 विधायक एकता की कसमें खा रहे थे.

इसी समय बीजेपी ने हार मान ली थी. सुप्रीम कोर्ट का फैसला सिर्फ एक औपचारिकता रह गई थी. शरद पवार ने जता दिया था कि वो इस बाजी को हारने के लिए नहीं खेल रहे हैं. मंगलवार को ये साबित हो गया पवार सही सोच रहे थे.

बीजेपी ने जिन नेताओं के दम पर अपने आपको शरद पवार पर बीस साबित होने का मुगालता पाला था उन्हें पवाड़ ने अनाड़ी साबित कर दिया था. महाराष्ट्र में बीजेपी की दुनिया लुट चुकी थी.

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