2019 के चुनावी सियासी घमासान से पहले रजनीकांत का ऐलान – नहीं लड़ूंगा लोकसभा चुनाव

नई दिल्ली। देश में 2019 का सियासी घमासान शुरू हो गया है। लेकिन इससे पहले सुपरस्टार रजनीकांत ने सभी तरह की अटकलों पर विराम लगाते हुए रविवार को घोषणा की कि वह आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, न ही वह किसी राजनीतिक दल का समर्थन करेंगे।

अपने फैन क्लब रजनी मक्कल मंदरम (आरएमएम) के लेटरहेड पर जारी एक बयान में उन्होंने अपने प्रशंसकों से कहा कि उनके नाम व तस्वीर का इस्तेमाल किसी के द्वारा वोट मांगने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। रजनीकांत ने कहा, “मैं आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने जा रहा हूं। हमारा लक्ष्य तमिलनाडु विधानसभा चुनाव है।

उन्होंने कहा कि मैं लोकसभा चुनाव में किसी पार्टी को समर्थन नहीं करने जा रहा। इसलिए कोई भी मेरी तस्वीर या आरएमएम के चिन्ह का इस्तेमाल समर्थन में या किसी पार्टी के चुनाव प्रचार में नहीं कर सकता।” 68 वर्षीय अभिनेता ने प्रशंसकों से अपील की, “आगामी चुनाव में तमिलनाडु की मुख्य समस्या पानी होगी। कोई भी पार्टी जो केंद्र में मजबूत व स्थायी सरकार बनाएगी और जो योजनाओं के जरिए तमिलनाडु के पानी की समस्या को स्थायी रूप से हल कर सकती है और इसे पूरा करने का आश्वासन दे, उसे समर्थन दिया जाना चाहिए और प्रशंसकों को इसी आधार पर वोट करना चाहिए।”

रजनीकांत के राजनीति में आने व चुनाव लड़ने को लेकर बहुत सारी अटकलें लगाई जाती रही हैं। उन्होंने कुछ समय पहले एम.करुणानिधि व जे.जयललिता के निधन से पैदा हुए राजनीतिक खालीपन को भरने के लिए सक्रियता से राजनीति में प्रवेश करने का संकेत दिया था। राजनीति में अपने प्रवेश की घोषणा के दौरान रजनीकांत ने कहा था कि वह दिवंगत एम.जी.रामचंद्रन जैसा अच्छा शासन प्रदान करने में सक्षम होंगे। एम.जी.रामचंद्रन, अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के संस्थापक थे।

रजनीकांत ने आध्यात्मिक राजनीति की बात की थी, जिससे उनके तमिलनाडु में लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को समर्थन देने की अटकलें लगने लगी थीं। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राजनीतिक रणनीतिकार झोन अरोकियासामी ने आईएएनएस से कहा, “इस घोषणा से रजनीकांत ने संकेत दिया है कि वह भाजपा व कांग्रेस से समान दूरी बना रहे हैं। इसके साथ ही वह एआईएडीएमके-भाजपा गठबंधन से कोई संबंध नहीं चाहते हैं।” अरोकियासामी ने कहा, “शायद ऐसा मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक व दूसरे राज्यों के हाल में हुए चुनावों में भाजपा की हार के बाद किया गया है। इसके अलावा वह जल समस्या का जिक्र करके तमिलनाडु के लिए लोकसभा चुनाव में एक मुद्दा तय कर रहे हैं।”

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