करवा चौथ पर पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को होगा फायदा, 70 साल बाद बना शुभ संयोग

इस बार करवा चौथ का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्‍योंकि 70 वर्ष बाद एक खास शुभ संयोग बन रहा है. इस बार रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग होना करवा चौथ को अधिक मंगलकारी बना रहा है. मंदसौर के ज्योतिर्विद रविशराय गौड़ ने बताया कि रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्याभामा योग इस करवा चौथ पर बन रहा है. पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत श्रेष्ठ है.

करवा चौथ का पर्व

  • 17 अक्तूबर गुरुवार
  • करवा चौथ पूजा मुहूर्त-सायं 05:46 से 07:02.
  • चंद्रोदय- रात्रि 08:20
  • चतुर्थी तिथि आरंभ- 06:48 (17 अक्तूबर)
  • चतुर्थी तिथि समाप्त- 07:28 (18 अक्तूबर)

करवा चौथ का व्रत

करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन मूल रूप से भगवान गणेश, मां गौरी और चंद्रमा की उपासना होती है. चंद्रमा को मन, आयु, सुख और शांति का कारक माना जाता है. इसलिए चंद्रमा की पूजा करके महिलाएं वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और पति की लम्बी आयु की कामना करती हैं.

पति की लंबी उम्र के लिए सुहागिनों को प्रार्थना के साथ इस मंत्र का उच्‍चारण करना चाहिए.

यही नहीं, करवा चौथ व्रत में पूरे शिव परिवार की पूजा होती है. साथ ही चतुर्थी स्वरूप करवा की भी पूजा होती है. इस दिन खासतौर पर श्री गणेश का पूजन होता है और उन्हें ही साक्षी मानकर व्रत शुरू किया जाता है. गणपति को चतुर्थी का अधिपति देव माना गया है. जबकि करवाचौथ व्रत का छान्दोग्योपनिषद, वामन पुराण, महाभारत एवं अन्य कई जगह ऋषियों के चिंतन में विवरण मिलता है.

पुराणों के अनुसार चंद्रमा नक्षत्रों में रोहिणी नक्षत्र को अत्यधिक प्रेम करता है. उसकी स्थिति इसी नक्षत्र पर होने से वह प्रेम प्रवर्धन की समृद्धि करने वाला योग निर्मित कर रहा है. यह व्रत सुहागिनें अपने पति के मंगल और समृद्धि के लिए करती हैं.

करवा चौथ व्रत की पूजा विधि

  • सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं. सरगी के रूप में मिला हुआ भोजन करें पानी पीएं और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें. करवाचौथ में महिलाएं पूरे दिन जल-अन्न कुछ ग्रहण नहीं करे फिर शाम के समय चांद को देखने के बाद दर्शन कर व्रत खोले.
  • पूजा के लिए शाम के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना कर इसमें करवे रखें.
  • एक थाली में धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर रखें और घी का दीपक जलाएं.
  • पूजा चंद्रोदय निकलने के एक घंटे पहले शुरू कर देनी चाहिए आज के दिन महिलाओं का एक साथ मिलकर पूजा करना श्रेष्ठ हैं.
  • पूजन के समय करवा चौथ कथा जरूर सुनें या सुनाएं.
  • चन्द्रमा को छलनी से देखने के बाद अर्घ्य देकर चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए.
  • चांद को देखने के बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलना चाहिए.
  • इस दिन बहुएं अपनी सास को थाली में मिठाई, फल, मेवे, रुपये आदि देकर उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त करें.

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