घोषणापत्र में कांग्रेस राम मंदिर को करें शामिल तो हम समर्थन देने पर करेंगे विचार – VHP

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर का मसला सुर्खियों में है। संत समाज, हिंदूवादी संगठन, शिवसेना-बीजेपी के नेता लगातार मंदिर निर्माण की मांग कर रहे हैं। कईयों ने तो राम मंदिर पर अध्यादेश लाने की मांग की है।

इस बीच विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने मोदी सरकार से नाराजगी जताई है। साथ ही कांग्रेस को ऑफर दिया है। वीएचपी ने साफ कर दिया है कि मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल में मंदिर निर्माण का काम शुरू होने की कोई उम्मीद नहीं बची है।

वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि जिस तरह किसी बच्चे के जन्म के लिए कम से कम नौ महीने का इंतज़ार करना पड़ता है, उसी तरह राम भक्त अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के लिए 2025 तक का इंतज़ार करने को तैयार हैं।

उन्होंने कांग्रेस पार्टी द्वारा अपने घोषणा पत्र में राम मंदिर का मुद्दा कभी शामिल नहीं किये जाने पर सवाल उठाए। प्रयागराज के कुंभ मेले में आए वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, ‘अगर कांग्रेस आने वाले लोकसभा चुनाव में मंदिर मुद्दे को अपने घोषणापत्र (मेनिफेस्टो) में जगह देती है तो वीएचपी उसे समर्थन देने पर विचार कर सकती है।’

आपको बता दें कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने हाल ही में कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद ही होगा। रावत ने कहा था, ‘बीजेपी इस मामले को सिर्फ मुद्दा बना रही है। ये पापियों की पार्टी है। जिसकी कोई मर्यादा नहीं है। हम नीतियों और संविधान में आस्था रखते हैं। अयोध्या में राम मंदिर तभी बन पायेगा जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनेगी। यह पक्की बात है।’

राम मंदिर पर कांग्रेस बार-बार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने की बात कहती रही है। मोदी सरकार भी अध्यादेश की मांग खारिज करते हुए अदालत के फैसले का इंतजार करने का भरोसा दिलाती रही है। अयोध्या विवाद फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है और इस मामले में पांच जजों की पीठ 29 जनवरी को सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में हो रही देरी से एक वर्ग नाराज है।

Leave a Comment