उद्योग लैंड बैंक की जमीन पर स्थापित होंगे हरित उद्योग

प्रदेश में उद्योगों के लिए आरक्षित लैंड बैंक में से 30 फीसदी भूमि पर हरित उधोग स्थापित किए जाएंगे। इस जमीन पर खाद्य प्रसंस्करण यूनिट लगाने के साथ फल-फूल, मसाला और सब्जी की खेती भी की जाएगी। इस जमीन के बीच में फल प्रसंस्करण इंडस्ट्री लगाई जाएंगी।

30 फीसदी भूमि पर हरित उधोग स्थापित किए जाएंगे। इस जमीन पर खाद्य प्रसंस्करण यूनिट लगाने के साथ फल-फूल, मसाला और सब्जी की खेती भी की जाएगी। इस जमीन के बीच में फल प्रसंस्करण इंडस्ट्री लगाई जाएंगी।

सरकार इंडस्ट्री लगाने के लिए किसानों को बैंकों से ऋण दिलाने में भी सहायता करेगी, इसके साथ उन्हें हरित उधोग लगाने पर जमीन अनुबंध पर लगने वाले स्टांप डयूटी पर भी छूट देगी।

प्रदेश में उद्योगों के लिए 41,668 हेक्टेयर लैंड बैंक बनाया गया है। इस में से 12,500 हेक्टेयर भूमि हरित उधोगों के लिए आरक्षित की जाएगी। इस भूमि पर प्रदूषण रहित उधोग लगाए जाएंगे। इसके अलावा यह इंडस्ट्री वायु प्रदूषण को भी काम करेगी। सरकार ने यह जमीन उद्यानिकी विभाग को दी है।

उद्यानिकी विभाग इस जमीन में पर फल, फूल, सब्जी तथा मसाला की खाती करने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रहा है। इसमें अलग-अलग जिलों में इसकी खेती करने के लिए कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। इसे बनाने से पहले उद्यानों की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी परीक्षण का डाटा तैयार किया जा रहा है।

स्थानीय किसानों को भी मिलेगी जमीन

हरित उधोग के लिए आरक्षित जमीन स्थानीय किसानों आवंटित की जाएगी। इसके लिए खुली निविदा से किसानों से खेती के लिए प्रस्ताव बुलाए जाएंगे। पहले आओ- पहले पाओ की तर्ज पर जमीन का आवंट किया जाएगा। किसानों को खेती के लिए एक से लेकर दो हेक्टेयर तक जमीन आवंटित की जाएगी।

फल, फूल, सब्जी मसाला की खेती के लिए अलग-अलग समय सीमा के लिए जमीन आवंटित की जाएगी। इन सब्जी, फलोद्यान की खेती के लिए किसानों को अनुदान भी सरकार उपलब्ध कराएगी।

लगेंगे फल, मसाला प्रसंस्करण उद्योग

सब्जी तथा फलोद्यान की खेती के साथ इसके प्रसंस्करण के लिए उद्योग भी लगाए जाएंगे। उद्योग लगाने के लिए बड़े-बड़े निवेशकों को भी बुलाया जाएगा। इसके अलावा बेरोजगार युवाओं को उद्योग लगाने के लिए सरकार आर्थिक सहायता देगी। इंडस्ट्री में तैयार उत्पादों को बेंचने के लिए बड़ी और नामी कंपनियों से एमओयू कराया जाएगा। जिससे ब्रांड मिलने बाद उनका उत्पाद राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बिक सके।

फूलों के लिए जमीन आरक्षित

फूलों की खेती के लिए होशंगाबाद, बाबाई, छिंदवाड़ा, भोपाल में 500 हेक्टेयर जमीन आरक्षित की गई है। होशंगाबाद जिले में दो सौ हेक्टेयर में विभिन्न तरह के फूलों की खेती थी जाएगी। इन जिलों में किस तरह से खेती की जाएगी और उसे बेंचने के लिए किस तरह की पैकिंग की जाएगी। इसका अध्ययन करने उद्यानकी विभाग का एक दल महाराष्ट्र गया था।

मसाल इंडस्ट्री पर विशेष जोर

मसाला की खेती और इंडस्ट्री पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मसाला की खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे वे कम लागत में ज्यादा से ज्यादा लाभ काम सकें। इसके अलावा उन्हें आर्गेनिक मसाला खेती करने की सलाह दी जाएगी। उन्हें यह बताया जाएगा कि बिना रसायन की खेती से फसलों की बच्छे दाम मिलते हैं। साथ ही इसकी बिक्री भी अंतर्राष्टीय स्तर पर होती है।

औद्योगिक के लिए आरक्षित की गई भूखंडों में से ३० फीसदी भूमि पर फल, फूल, सब्जी और मसाला की खेती की जाएगी। यह जमीन किसानों को अलग-अलग समय के लिए आवंटित की जाएगी।

Leave a Comment