कोरोना संक्रमित मरीजों के शवों की दुर्दशा

-अंतिम संस्कार कराने 6 घंटे परेशान रहे परिजन, ग्वालियर में सरकारी व्यवस्थाओं की खुली पोल

ग्वालियर. कोरोना संक्रमित मरीजों के शवों की अब दुर्दशा हो रही है. मरीजों के शवों का अंतिम संस्कार करने किए गए सरकारी इंतजाम की रविवार को पोल खुल गई. एक संक्रमित मरीज के अंतिम संस्कार के लिए परिजन को छह घंटे इंतजार करना पड़ा. परेशान होना पड़ा. परेशानी का मुख्यकारण विद्युत शवदाह गृह की ट्रॉली टूटना था. बताया जाता है कि कोरोना संक्रमित मुरार निवासी रामप्रकाश गुप्ता 8 जुलाई को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती हुआ था. रविवार सुबह उसकी मौत हो गई. अंतिम संस्कार के लिए उनके बेटे दोपहर 12 बजे से पोस्टमार्टम भवन और सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के चक्कर काट रहे थे लेकिन उन्हें पता चला कि एक अन्य कोरोना मरीज के अंतिम संस्कार के समय विद्युत शवदाह गृह की ट्रॉली फंस कर टूट गई. रामप्रकाश गुप्ता के परिजन अधिकारियों को फोन लगाकर बार-बार पूछते रहे कि आखिर उनके पिता का अंतिम संस्कार कब होगा. शाम 6 बजे जब मशीन ठीक हुई, तब जाकर साढ़े 6 बजे उनका अंतिम संस्कार हो सका.

एक-दूसरे को सूचना देने में लगाए 5 घंटे

जानकारी के मुताबिक लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम स्थित विद्युत शवदाह गृह में कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार किया जाता है. रविवार सुबह यहां एक अन्य कोरोना संक्रमित वीरेंद्र खंडेलवाल के अंतिम संस्कार के बाद जब ट्रॉली बाहर निकाली जा रही थी, तभी उसका एक हिस्सा टूट गया और वह फंस गई. इंसीडेंट कमांडेंट कुलदीप दुबे ने रामप्रकाश गुप्ता के शव के अंतिम संस्कार के लिए नगर निगम के अधिकारी अतिबल सिंह यादव से संपर्क किया तो पता चला कि मशीन खराब हो गई है. शवदाह गृह के नोडल अधिकारी अतिबल सिंह यादव ने वर्कशॉप प्रभारी श्रीकांत कांटे को मशीन खराब होने की सूचना दी. नोडल अधिकारी द्वारा बार-बार वर्कशॉप में फोन करने के बाद शाम करीब 5 बजे हेल्पर राजेंद्र सिंह को लक्ष्मीगंज भेजा. तब जाकर लगभग छह बजे मशीन में सुधार हो सका.

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