ग्वालियर नगर निगम में नामांकन विज्ञप्ति के प्रकाशन में करीब 30 लाख रुपये का गबन

ग्वालियर। नगर निगम में गबन और वित्तीय अनियमिताओं के मामले आये दिन सामने आते रहते हैं अभी तक जनकार्य और भवन अनुमति शाखा में ही इस तरह की वित्तीय गड़बडिय़ां सामने आती थी मगर अब नामांकन विज्ञप्ति के प्रकाशन में भी लाखों रुपये के गबन का मामला प्रकाश में आया है। इसमे कुछ कर संग्रहकों ने आवेदकों से सीधे पैसे लेकर विज्ञप्तियों का प्रकाशन अपने स्तर पर करवा दिया। इनकी कीमत करीब 30 लाख रुपये बताई जाती है।

नियमानुसार नामांकन के लिए आवेदकों को दो समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रकाशन का संकल्प पारित किया गया है। इसके लिए निगम आवेदक से 5 हजार रुपये वसूल रहा था। मगर शहर के अनेक संगठनो के भारी विरोध के बाद निगम के मुखिया प्रशासक संभागयुक्त एम बी ओझा ने इस आदेश को बदल दिया था। बदले हुए आदेश में आवेदक को यह सुविधा दी गई थी कि वह स्वयं किसी भी दो समाचार पत्र में विज्ञप्ति प्रकाशित करवाकर निगम में प्रस्तुत कर सकता है।

ऐसे में आवेदक को पहले जो 5 हजार निगम को देने पड़ते थे उसका वह काम अब कम में होने लगा। ऐसे में निगम के कुछ कर संग्रहकों और सम्पतीकर विभाग के बाबुओं ने मिलीभगत से निगम के खजाने को लाखों रुपये का चूना लगा दिया। चूना लगाकर इन बाबू और कर संग्रहको ने अपने स्तर पर ही कुछ जगह विज्ञप्ति प्रकाशित करवा दीं। जिन जगह यह विज्ञप्ति प्रकशित की गई वहां नियम से एक एक करके आवेदक के हिसाब से प्रकाशित होनी चाहिए थी मगर ऐसा नही होकर सम्पत्तिकर बाबुओं ने एक साथ सैकड़ों विज्ञप्तियों का प्रकाशन करवा दिया। इसके बदले में सबंधित क्लर्क और कर संग्रहको ने निगम के खजाने को चूना लगते हुए व्यक्तिगत फायदा किया है।

सामान्यत: एक साथ निगम के सहायक आयुक्त के नाम से जो विज्ञप्ति प्रकशित की गई है, उनके पैसे निगम के खजाने में जमा होने की बजाय इनकी जेब मे पहुंच गए। इस तरह की आधा सैकड़ा से अधिक विज्ञप्ति अभी तक जांच में सामने आ चुकी है।

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