शिव के राज में किसान पर टूटा कहर, अफसरों ने बरसाई लाठियां-मारे लात

2 लाख रुपये कर्ज लेकर गरीब किसान ने की थी खेती, जमीन खाली कराने पहुँचे अफसरों से मांगी थी मोहलत, नही सुनी फरियाद

भोपाल. प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही गरीब किसानों पर अत्याचार शुरू हो गए। मंगलवार को गुना जनकपुर के पास साइंस कॉलेज के लिए आवंटित जमीन को खाली कराने पहुंचे पुलिस और जिला प्रशासन के अफसरों ने लाठियां बरसाईं। लात मारे। इस दौरान किसान व उसका परिवार अफसरों से समय देने की गुहार लगाता रहा, लेकिन उसकी फरियाद नहीं सुनी गई। जिसके बाद किसान ने कीटनाशक पी लिया। बतादें कि साइंस कॉलेज के लिए आवंटित भूमि से कब्जा हटाने के दौरान मंगलवार को एक दलित किसान दंपती ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या का प्रयास किया। यह घटना जगनपुर चक की दोपहर 2.30 बजे की है। दंपती अपने 7 बच्चों के साथ प्रशासनिक- पुलिस अफसरों के सामने हाथ जोड़ता रहा। उसका कहना था कि यह भूमि गप्पू पारदी ने उसे बटिया पर दी है। कर्ज लेकर वह बोवनी कर चुका है। अगर फसल उजड़ी तो बर्बाद हो जाएगा, लेकिन किसान की फरियादी किसी ने नहीं सुनी। अफसरों का सिर्फ एक मिशन था किसी तरह फसल को उजाड़ा दिया जाए। इसी बात से दुखी होकर किसान राजकुमार अहिरवार और पत्नी ने जहर पी लिया, लेकिन अधिकारी उसे नाटक मानते रहे। काफी देर तक दोनों खेत में ही पड़े रहे। कुछ समय बाद राजकुमार का छोटा भाई आया उसने विरोध किया तो पुलिस ने उस पर लाठियां बरसाईं और लाते मारी। इस असंवेदनशील भूल और लाठी बरसाते, किसान के जहर पीते हुए वीडियो भी वायरल हुआ। इधर पुलिस अधिकारियों का कहना था कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है। पूरे घटनाक्रम से ही बचने का प्रयास करते रहे।

परिवार ने झूमाझटकी की, इसलिए की सख्ती

तहसीलदार निर्मल राठौर का कहना था कि परिवार ने महिला पुलिस के साथ झूमाझटकी की। इस वजह से सख्ती दिखाई। वहीं कैंट टीआई योगेंद्र जादव का कहना है कि पुलिस ने लाठी नहीं बरसाईं है, जब उसने कहा कि इसके वीडियो वायरल हो रहे हैं तो बोले ऐसा कुछ नहीं है। उधर पुलिस ने भी बटियादार और उसके परिवार पर प्रकरण दर्ज किया है। जहर पीने की घटना के बाद छोटा भाई राजू ने विरोध किया तो पुलिस ने उस पर लाठियां बरसाना शुरू कर दिया। लातें भी मारी। बटियादार के परिवार की महिलाओं के साथ भी पुलिस ने खींच तान की, इससे उनके कपड़े तक फट गए।

किसान राजकुमार ने बताया कि उसने 2 लाख रुपये कर्ज लेकर बोवनी की है। इससे पहले का भी उस पर 2 लाख का कर्ज चढ़ा हुआ है। चूंकि भूमि पर बुवाई हो चुकी है और अंकुर भी आ चुके हैं। इसलिए पूरे परिवार ने अनुरोध किया, हाथ जोड़े कि बाद में यह प्रक्रिया पूरी कर लेना, लेकिन अफसर नही माने। मंगलवार सुबह 11 बजे ही तहसीलदार निर्मल राठौर, कैंट थाने का बल इस स्थल पर पहुंच चुका था। नपाई आदि की गई, दोपहर 2.30 बजे जेसीबी से फसल उजाड़ना शुरू कर दिया। छोटे-छोटे बच्चे भी रोते रहे। जब हदें पार हो गई तो राजुकमार और उसकी पत्नी सावित्री बाई ने जहर पी लिया। वह जमीन पर गिर पड़े। मासूम बच्चे उनके पास बैठकर रोते रहे और उन्हें उठाते रहे, लेकिन अफसर दूर खड़े होकर तमाशा होकर रहे। कुछ देर बाद दोनों को उठाकर जिला अस्पताल भिजवाया गया।

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