BPCL के कर्मचारीयों ने की हड़ताल, पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की सप्लाई हो सकती है बाधित

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल डीजल और एलपीजी की सप्लाई बाधित हो सकती है. भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड यानि बीपीसीएल और हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड यानि एचपीसीएल के कुल मिलाकर तकरीबन 34,000 कर्मचारी आज देशभर में हड़ताल पर हैं. एचपीसीएल कि एक रिफाइनरी जबकि बीपीसीएल की चार रिफाइनरी के कर्मचारी इसमें शामिल हैं. इसीलिए यह अंदेशा बना हुआ है की पेट्रोल डीजल और एलपीजी की सप्लाई बाधित हो सकती है.

दरअसल, आज भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के तकरीबन 22,000 कर्मचारी सरकार के विनिवेश के फैसले के विरोध में हड़ताल पर हैं. वहीं इस हड़ताल को तकरीबन 12,000 एचपीसीएल के कर्मचारियों का भी समर्थन मिला है. पेट्रोलियम एंप्लाइज यूनियन के जनरल सेक्रेटरी बृजमोहन ने बताया की बीपीसीएल के साथ में एचपीसीएल के कर्मचारी भी इस हड़ताल में हिस्सा है. इस हड़ताल के चलते देश में पेट्रोल डीजल और एलपीजी सप्लाई की किल्लत हो सकती है क्योंकि बीपीसीएल की चार रिफाइनरी और एचपीसीएल की एक रिफाइनरी के सभी कर्मचारी आज हड़ताल पर हैं. एलपीजी डिपो से भी सप्लाई बाधित है.

उन्होंने बताया कि हमारी यह हड़ताल केंद्र सरकार के विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश के फैसले को लेकर है. गौरतलब है कि हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने बीपीसीएल में सरकारी हिस्सेदारी बेचने को लेकर मंजूरी दी है. इसी को लेकर कर्मचारी अब हड़ताल पर जाने का ऐलान कर रहे हैं.

मैनेजमेंट और कर्मचारियों में ठनी

28 नवंबर की हड़ताल को लेकर भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के मैनेजमेंट और कर्मचारियों के बीच में तलवारें खिंची हुई हैं. दरअसल जब कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल का नोटिस दिया था तो मैनेजमेंट ने कर्मचारियों को एक पत्र जारी कर हड़ताल टालने को कहा था. हड़ताल पर जाने की सूरत में एक दिन के बजाय 8 दिन की तनख्वाह काटने के लिए मैनेजमेंट ने कहा था. लेकिन कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि वह मैनेजमेंट के आगे नहीं झुकेंगे और आज की उनकी हड़ताल इसी दिशा में एक कदम है.

क्या था मामला-

केंद्र सरकार के भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी बीपीसीएल के निजीकरण के फैसले के खिलाफ तमाम कर्मचारी यूनियन लामबंद हो गई है. इस हड़ताल में बीपीसीएल के साथ एचपीसीएल के कर्मचारी भी शामिल हैं. हड़ताल में बीपीसीएल की सभी रिफाइनरी डिपो और बॉटलिंग प्लांट के सभी कर्मचारी शामिल हैं. कर्मचारियों का कहना है कि सीसीईए भारत पेट्रोलियम को प्राइवेट कर रहा है. इसी को लेकर कर्मचारियों में गुस्सा है.

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