ओबीसी को उनके अधिकारों से वंचित रखना चाहती है भाजपा सरकार

-प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में संयुक्त रूप से हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस, पूर्व मंत्री जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल और सचिन यादव ने पत्रकारों से बातचीत की

-भोपाल में कांग्रेस की संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस में सचिन यादव ने कहा-ओबीसी आरक्षण को विद्वेष की बलि न चढ़ाएं

भोपाल. ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने की मांग को लेकर सोमवार को प्रदेश कांग्रेस ने सोमवार को भोपाल में एक संयुक्त प्रेस
कॉन्फ्रेंस की. इसमें पूर्व मंत्री जीतू पटवारी, सचिन यादव और कमलेश्वर पटेल शामिल हुए. प्रदेश कांग्रेस ने राज्य सरकार पर प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग को उनके अधिकारों से वंचित रखने का आरोप लगाया. प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को जो 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था, उसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए. उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण विधेयक विद्धेष की बली नहीं चढ़ने पाए, इसलिए राज्य की मौजूदा सरकार का यह दायित्व बनता है कि वह अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकार सुनिश्चित कराए. पत्रकारों से बातचीत में पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और सचिन यादव भी मौजूद थे.

54 फीसदी जनसंख्या ओबीसी

जीतू पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या प्रदेश की कुल जनसंख्या का लगभग 86 प्रतिशत है. अकेले अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या लगभग 54 प्रतिशत है. मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद सरकार ने अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की तरक्की और उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अनेक कार्य किए हैं.

सचिन यादव ने कहा-वकील खड़ा करेगी कांग्रेस

पूर्व मंत्री सचिन यादव ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्गों को रोजगार एवं शिक्षा में दिया गया 27 प्रतिशत आरक्षण को सरकार लागू करवाए. कांग्रेस अपनी ओर से कोर्ट में अन्य पिछड़ा वर्ग का पक्ष रखने के लिए वकील खड़ा करेगी.

2019 में हुआ था ओबीसी आरक्षण अधिनियम में संशोधन

पूर्व मंत्री पटवारी ने कहा कि इसी क्रम मे कांग्रेस सरकार ने मध्यप्रदेश लोकसेवा अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण अधिनियम मे वर्ष 2019 में संशोधन कर पिछड़ा वर्ग के लिए शासकीय सेवाओं में आरक्षण का प्रतिशत 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था. साथ ही इंटरव्यू एवं प्रमोशन के लिए बनी समितियों में भी ओबीसी के प्रतिनिधि को रखना आवश्यक किया था.

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