बंगाल उपचुनाव: ममता ने मारी बाज़ी, प्रशांत किशोर और तेलुगु वोटर्स है इसके पीछे की खास वजह

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में पिछले दिनों हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी ने ज़ोरदार प्रदर्शन करते हुए तीनों सीटों पर कब्जा जमाया. ये सीटें हैं खड़गपुर, करीमपुर और कलियागंज. इससे पहले कलियागंज सीट पर ही केवल तृणमूल कांग्रेस का कब्जा था, जबकि खड़गपुर सीट बीजेपी तथा करीमपुर सीट कांग्रेस के पास थी. छह महीने पहले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इन इलाकों में टीएमसी को कड़ी टक्कर दी थी. तो आखिर इन छह महीनों में ऐसा क्या हुआ जो ममता बनर्जी ने यहां की बाज़ी पलट दी.

खड़गपुर में रेलवे के निजीकरण का मुद्दा
टीएमसी ने खड़गपुर सदर में रेलवे के निजीकरण का मुद्दा उठाया. यहां इस मुद्दे को लेकर गैर-बंगाली वोटर्स खासकर तेलुगु भाषी लोग खासे नाराज़ थे और ममता की पार्टी ने इसे भुनाने की कोशिश की. खड़गपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में करीब 2.24 लाख वोटर्स हैं, जिसमें से करीब एक लाख गैर-बंगाली और तेलुगु हैं. यहां रहने वाले ज़्यादातर लोग रेलवे में काम करते हैं.

कलियागंज में NRC का मुद्दा
कलियागंज में टीएमसी ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC का मुद्दा उठाया. लोगों को बताया गया कि केंद्र सरकार अब असम के बाद यहां भी NRC लाने वाली है. यहां टीएमसी ने बड़े-बड़े होर्डिंग्स, पोस्टर्स लगवाकर लोगों को NRC से होने वाले नुकसान के बारे में बताया. लोगों को ये बताने की कोशिश की गई ममता बनर्जी NRC के सख्त खिलाफ है.

TMC को कड़ी टक्कर
हालांकि यहां ममता बनर्जी की पार्टी को बड़े अंतर से जीत नहीं मिली. दरअसल इन इलाकों में 50 फीसदी जनसंख्या में राजबोंशी समुदाय के लोग रहते हैं और ये सब यहां NRC लाने के पक्ष में हैं. यहां टीएमसी के तपन देब सिंघा ने बीजेपी के उम्मीदवार कमल चंद्र सरकार को 2304 वोटों से हराया.

20% वोट का स्विंग
धमाकेदार जीत के बाद टीएमसी की इंटरनल रिव्यू में बताया गया कि पार्टी को खड़गपुर सदर और कलियागंज में करीब 60-70 हज़ार वोटों का स्विंग मिला. यानी पार्टी करीब 20 फीसदी वोट खींचने में कामयाब रही. खड़गपुर की सीट पर हमेशा कांग्रेस का दबदबा रहा है. यहां कांग्रेस के ज्ञान सिंह सोहनपाल को 1982 से लगातार जीत मिली है.

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