अयोध्या जमीन विवाद: सुप्रीम कोर्ट में खत्म हुई 40 दिनों से चल रही ऐतिहासिक बहस, 23 दिन में आ सकता है फैसला

लखनऊ. देश के दशकों पुराने राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद के अयोध्या जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को ऐतिहासिक बहस पूरी हो गई. 40 दिनों तक चली इस सुनवाई के बाद संविधान पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया और सभी पक्षों से कहा कि वे मोल्डिंग ऑफ़ रिलीफ पर 3 दिनों में कोर्ट को लिखित जवाब दें. बहस पूरी होने के बाद हिंदू महासभा के वकील वरुण सिन्हा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब ये साफ है कि इस मामले में 23 दिन के भीतर फैसला आ जाएगा.

इससे पहले सुनवाई के आखिरी दिन सभी पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की. इस दौरान मुस्लिम और हिंदू पक्ष के बीच कई बार नोंक-झोंक भी देखने को मिली. नौबत यहां तक आ गई कि हिंदू महासभा की तरफ से पेश हुए वकील ने राम जन्मस्थान का एक नक्शा कोर्ट में पेश किया. इसकी एक कॉपी मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को भी दी. राजीव धवन ने इसका विरोध किया और कहा मैं इसे नहीं मानता. जिस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा ठीक है आप मत मानिए. इसके बाद राजीव धवन ने नक्शे को फाड़ दिया.

40वें दिन हिंदू पक्ष से सीएस वैद्यनाथ ने शुरू की बहस

इससे पहले बुधवार को बहस के 40वें दिन हिंदू पक्ष की तरफ से सीएस वैद्यनाथन ने बहस शुरू की. रामलला विराजमान की तरफ से सीएस वैद्यनाथन ने दावा किया 1934 तक ही विवादित स्थल पर नमाज हुई. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन से कहा कि अब आपका समय पूरा हो गया है. जिसके बाद सीएस वैधनाथन ने कहा कि कुछ मिनट और. इसी बीच गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार बहस के लिए खड़े हुए. चीफ जस्टिस ने रंजीत कुमार को कहा कि कल आपने कहा था कि आप केवल 2 मिनट बहस करेंगे. रंजीत कुमार ने कहा कि दो मिनट में बहस कैसे पूरा करूंगा? चीफ जस्टिस ने मुस्कुराते हुए कहा कि कल तो आप 2 मिनट कह रहे थे. सीएस वैद्यनाथन ने बहस पूरी करते हुए कहा कि बिना संपति के मालिक हुए मुस्लिम पक्ष मालिकाना हक का दावा कर रहा है.

हिंदुओं के कण-कण में भगवान की मान्यता
गोपाल सिंह विशारद की तरफ से वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा कि कैलाश पर्वत पर शिव की मूर्ति या कोई देवता का चिन्ह नहीं है, लेकिन पूरे पर्वत को देवता के तौर पर पूजा जाता है. हिन्दुओं में कण -कण में भगवान कि मान्यता है.

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