श्योपुर में कुपोषण बना अभिशाप एनआरसी में बिस्तर खाली, गांवों में कुपोषण

जो गांवों में कुपोषित, उन्हे लेकर कौन आएगा?

श्योपुर – स्वास्थ्य विभाग का दस्तक अभियान धरातल पर चल तो रहा है लेकिन वह तब तक असफल है जब तक कुपोषित बच्चों को पोषित होने के लिए वह विजयपुर एनआरसी तक ना पहुंचा सके।
विजयपुर विकासखंड के भीतर गांवों में कुपोषण पाया गया है लेकिन उसके बाद भी विजयपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एनआरसी के बिस्तर खाली पड़े हुए गांव में पाए गए कुपोषित बच्चों को अभी तक भर्ती नहीं किया गया है और जिन बच्चों को पहले लेकर आए थे उन्हे एक दिन भी नहीं रोक सके विभाग के कर्मचारी। श्योपुर की विजयपुर तहसील पहले से ही कुपोषण के लिए हाइलाइट है सरकार भी इस विकासखंड के लिए दोनो हाथ खोल कर पैसा खर्च करती है लेकिन क्या सरकार पैसा और योजनाएं इन तक नहीं पहुंच पा रही या फिर महिला बाल विकास या स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का दंश झेल रहे है विजयपुर विकासखंड के आदिवासी।

  • एक दिन नहीं रुके कुपोषित बच्चे
    विजयपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एनआरसी में 06 कुपोषित बच्चों को भर्ती किया गया जिसमे से केवल एक बच्चा ही पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर घर लौटा बाकी पांच बच्चे एक दिन से ज्यादा न रुके और वापस जैसे के तैसे लौट गए अब ये बच्चे क्यों वापस लौटे ये काउंसलिंग का विषय है और स्वास्थ्य विभाग एवम महिला बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी है।
  • कौन किस तारीख में आया कब गया*
    जनजीत जिसकी उम्र दो वर्ष है पिता का नाम भ्रकवान माता मावसिया निवासी मगरदा 03/07/2023 को भर्ती हुआ और 03 तारीख को ही चला गया।
    रीना जिसकी उम्र 08 माह पिता भूरसिंह माता केसर निवासी पिपरवास 12/07/2023 को एमआरसी में भर्ती हुई और दो दिन बाद 14 को घर चली गई।
    किशन जिसकी उम्र 01 वर्ष पिता लखमी माता जमुना निवासी हरदौलपुरा 13/07/2023 को एनआरसी में भर्ती हुआ और 21/07/2023 को पूर्ण स्वस्थ होकर घर लौटा।
    सौम्या जिसकी उम्र 36 माह पिता देशराज माता प्रीति निवासी उमरी 19/07/2023 को एनआरसी में भर्ती हुई और 20/07/2023 को ही वापस चली गई।
    सायना जिसकी उम्र 18 माह पिता देशराज माता प्रीति निवासी ऊमरी 19/07/2023 को भर्ती हुई और एक दिन बाद 20 तारीख को घर चली गई।
    बालकराम जिसकी उम्र 18 माह पिता रघुराज माता श्रीमति निवासी दाउदपुर 19/07/2023 को भर्ती हुई और एक दिन बाद 20 तारीख को घर चली गई।
    इन छ नामो में से केवल किशन ही ऐसा है जिसने पूर्ण रूप से एनआरसी में रुककर कुपोषण को हराकर ठीक होकर घर गया है बाकी एक दिन दो दिन रुककर वापस गए।
    जबकि एनआरसी स्टाफ का कहना है कि कुपोषण ठीक होने के लिए कम से कम 10 दिन का समय लगता है और बच्चो को एनआरसी में रुकना पड़ता है।
  • कुपोषित जो नही पहुंचे एनआरसी*
    स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताए गए अभी छः नाम ऐसे और आए है जो की गांवों में कुपोषित है और अभी तक स्वास्थ्य विभाग के एनआरसी तक नहीं पहुंचे
    तमन्ना आदिवासी माता रविता पिता किशनु उम्र 02 वर्ष निवासी खजुरी कला
    सोमवती आदिवासी माता गुड़िया पिता वासुदेव उम्र 01 वर्ष निवासी खजुरी कला।
    रिकाशी आदिवासी माता सरिता पिता राकेश उम्र 03 वर्ष निवासी खजुरी कला
    अलकेश आदिवासी माता मुन्नी पिता मोतीलाल उम्र 03 वर्ष निवासी खेड़ा
    रोहनी आदिवासी माता सुखिया पिता हरिचरण उम्र 01 वर्ष निवासी पीपल बावड़ी
    पवन आदिवासी माता राजकुमारी पिता मातादीन उम्र 02 वर्ष निवासी पीपल बावड़ी
    ये छः नाम ऐसे कुपोषित बच्चों के हैं जो कुपोषित है लेकिन अभी तक एनआरसी नहीं पहुंचाए गए है।
    एक तरफ सरकार श्योपुर के माथे से कलंक हटाने का दावा कर रही है वहीं दूसरी तरफ आदिवासियो की बस्ती में कुपोषण पाया जा रहा है। क्या सिर्फ नेताजी के भाषणों तक सीमित है कुपोषण की जंग या अधिकारियों के कागजों में बंद है कुपोषण।
    अदम गोंडवी साहब ने भी इसी बात पर क्या खूब लिखा था तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम बड़ा गुलाबी है ,मगर ये आंकड़े झूठे और दावा किताबी है।
    हो सकता है कि सरकार और उनके नुमाइंदों के आंकड़ों में कुपोषण खत्म हो गया हो लेकिन दिए गए नामो और रिपोर्ट्स ने यह साबित कर दिया है कि कुपोषण श्योपुर के माथे पर अभी तक कलंक है।

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