पुलिस को जीरो एफआईआर दर्ज करने में 14 दिन क्यों लगे

मणिपुर हिंसा पर सोमवार को संसद में जोरदार हंगामा

नई दिल्ली – मणिपुर हिंसा पर सोमवार को संसद में जोरदार हंगामा हुआ। राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने मुद्दे पर अल्पचर्चा की मंजूरी दे दी, लेकिन सदन में हंगामा जारी रहा। धनखड़ ने अपने ऑफिस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और कुछ मंत्रियों से भी बात की, ताकि सदन में गतिरोध दूर किया जा सके। उधर, मणिपुर हिंसा की वायरल वीडियो मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जब घटना 4 मई को हुई तो एफआईआर 18 मई को क्यों दर्ज की गई? 4 मई से 18 मई तक पुलिस क्या कर रही थी? यह घटना सामने आई कि महिलाओं को नग्न कर घुमाया गया और कम से कम दो के साथ बलात्कार किया गया। पुलिस क्या कर रही थी? सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक हाई लेवल कमेटी बनाने की बात भी कही है। सीजेआई ने कहा कि हमारे पास समय ख़त्म हो रहा है, तीन महीने बीत गए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई मंगलवार को 2 बजे होगी। राज्यसभा में सोमवार को मणिपुर मुद्दा उठा तो सरकार ने कहा कि हम इस पर आज ही चर्चा को तैयार हैं। दोपहर 2 बजे इस पर चर्चा हो। राज्यसभा सांसद पीयूष गोयल ने कहा- विपक्ष चर्चा से भाग रहा है, वो सच को सामने नहीं आने दे रहा। विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर अड़ गए। 2 बजे जब सदन शुरू हुआ तो सभापति ने मणिपुर पर अल्पचर्चा को मंजूरी दे दी, लेकिन हंगामा जारी रहा। इसके बाद सदन की कार्यवाही पहले 2.30 बजे और फिर 3.30 बजे तक स्थगित कर दी गई। 3.30 के बाद जब राज्यसभा शुरू हुई तो भी हंगामा जारी रहा, इसके बाद अगले दिन (1 अगस्त) 11 बजे तक सदन स्थगित हो गया। अकेला मामला नहीं सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि इन तीन महिलाओं के यौन उत्पीडऩ का वीडियो एकमात्र उदाहरण नहीं है। ऐसी कई घटनाएं हुई हैं और यह कोई अकेली घटना नहीं है। हम इस बात से निपटेंगे कि इन तीन महिलाओं को जल्द न्याय मिले, लेकिन हमें मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के व्यापक मुद्दे को भी देखना होगा। बता दें कि मणिपुर में जारी हिंसा के बीच दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराए जाने का मामला सामने आया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया। समिति बनाने का सुझाव चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने साफ कहा कि महिलाओं के खिलाफ दरिंदगी के मामले में तत्काल न्याय होना चाहिए। समिति के गठन पर सीजेआई का कहना है कि समिति के गठन के दो तरीके हैं – हम खुद एक समिति का गठन करे, जिसमें महिला और पुरुष न्यायाधीशों के साथ इस क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हों। इनका काम सिर्फ ये पता लगाना नहीं होगा कि क्या हुआ है, बल्कि उनकी जिन्दगी फिर से कैसे सामान्य हो सके, इसकी भी कोशिश करनी होगी। सीजेआई का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की सीमा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि सरकार ने अब तक क्या किया है। यदि सरकार ने जो किया है उससे हम संतुष्ट होंगे, तो फिर हस्तक्षेप नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट की आड़ में सरकार बच सकती है अविश्वास प्रस्ताव से मणिपुर मामले में विपक्ष 267 के तहत चर्चा कराने की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार 176 के तहत चर्चा कराने को तैयार है। ऐसे में विपक्षी गठबंधन इंडिया ने मणिपुर मामले में सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव ले आया है, जिसे मंजूर कर लिया गया है। लेकिन अभी तक सरकार ने चर्चा कराने का कोई संकेत नहीं दिया है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अब जब मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है तो सरकार उसकी आड़ लेकर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से बचने की कोशिश कर सकती है।

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